उपासना एवं व्यवहार दोनों धर्म का जीवन में महत्व- आचार्य महाश्रमण

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श्री डूंगरगढ़, (बीकानेर)। “किसी का कंठ छेदन करने वाला व गला काटने वाला व्यक्ति जितना हमारा नुकसान नहीं कर सकता उतना नुकसान हमारी आत्मा के दुरात्मा बनने पर हो जाता है। आत्माओं के चार रूपों में बांटा गया है– परमात्मा, महात्मा, सदात्मा और दुरात्मा। जो सिद्ध आत्माएं होती हैं, वे राग द्वेष से मुक्त होती हैं, वह परमात्मा होती है, वह आत्मा की परम स्थिति है। जो साधु–संत आदि त्यागी महापुरुष होते हैं, वे महात्मा होते हैं। जो गृहस्थ सदाचार से युक्त जीवन जीते हैं, वे सदात्मा एवं जो हिंसा, झूठ, चोरी व हत्या से लिप्त होते हैं, वे दुरात्मा होते हैं।” युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण ने श्री डूंगरगढ़ के ऊपरलो तेरापंथ भवन की धर्मसभा में ये उद्गार व्यक्त किए। इस प्रवचन सभा में उन्होंने कहा- ‘उपासना, सामायिक, सेवा-दर्शन के साथ-साथ धर्म आचरण में भी उतारे जाने की आवश्यकता है। आचार्य तुलसी ने अणुव्रत आन्दोलन का प्रवर्तन कर अणुव्रत के छोटे–छोटे नियमों द्वारा सदाचार, संयम, अहिंसा व नैतिकता से युक्त जीवन जीना सिखाया। हमारे भीतर के भाव बढ़िया हों, शुद्ध हों। कुएं में जैसा पानी होता है, वैसा ही बाहर आता है। उसी प्रकार हमारे भावों का असर ही व्यवहार पर होता है। उपासना एवं व्यवहार दोनों प्रकार के धर्म का महत्व है। जीवन में सदाचार आए और दुरात्मा को तज कर व्यक्ति सदात्मा बने तो जीवन सफल बन सकता है।’

श्री डूंगरगढ में आध्यात्मिक भावना बनी रहे

श्री डूंगरगढ़ के संदर्भ में आचार्य श्री ने कहा, श्री डूंगरगढ़ में समाज में खूब एकता एवं समरसता बनी रहे। समाज के भवनों का खूब धार्मिक उपयोग बना रहे और आध्यात्मिक गतिविधियां चलती रहे मंगलकामना।आचार्य श्री महाश्रमण के त्रिदिवसीय प्रवास से श्री डूंगरगढ़ में आध्यात्मिक मेला लगा हुआ है। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ हजारों की संख्या में प्रवासी श्रावक–श्राविकाएं भी अपनी धरा पर अपने आराध्य का पावन आशीष पाने पहुंचे हैं। आचार्यश्री ने प्रातः भ्रमण के दौरान स्थान–स्थान पधार कर श्रद्धालुओं की प्रार्थनाओं पर पगलिया, मंगलपाठ प्रदान कर अपनी कृपा से सबको कृतार्थ किया। वर्षों पश्चात तेरापंथ के अनुशास्ता का सान्निध्य श्री डूंगरगढ़ को मिला है।

कार्यक्रम के दौरान स्वागताध्यक्ष भीखमचंद पुगलिया, प्रवास समिति मंत्री पन्नालाल पुगलिया, नगरपालिका से अंजू पारख, दौलत डागा, शशि नाहर, तेरापंथ सभा मंत्री पवन सेठिया, संगीता दुगड़, मिताली बोथरा, अजय भंसाली, पूर्णिमा नाहटा, अरिहंत बाफना, नागरिक विकास परिषद से विजराज सेवक, लायंस क्लब से महावीर प्रसाद माली, विक्रम मालू, श्याम महर्षि, सत्यदीप, रितु सुराना आदि वक्ताओं ने आचार्य श्री कै स्वागत में अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम संचालन मुनि दिनेश कुमार ने किया।
तेरापंथ महिला मंडल, कन्या मंडल, तेरापंथ किशोर मंडल गीत, रमजान मधुर बैंड, सुनील लुणिया, सरोज देवी दुगड़, मिताली बोथरा आदि ने पृथक–पृथक रूपों में गीत का संगान किया।[the_ad id=”771″]

इस अवसर पर ‘साध्वी श्री पानकुमारी (प्रथम) श्री डूंगरगढ़ की जीवनी – साधना सोपान’ का भी आचार्य श्री के चरणों में लोकार्पण किया गया।

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Author: kalamkala

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