सुभाष बोस के व्यक्तित्व से प्रभावित हुआ पूरा शहर भव्य जुलूस के साथ मनाई सुभाष बोस जयंती

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सुभाष बोस के व्यक्तित्व से प्रभावित हुआ पूरा शहर
भव्य जुलूस के साथ मनाई सुभाष बोस जयंती
लाडनूं। नेताजी सुभाष बोस को साकार करते हुए विद्यार्थी का स्वागत करने के लिए लाडनूं के महिला-पुरूष उमड़ पड़े, तिलकार्चन और पुष्पवर्षा करके पूरे शहर में भव्य स्वागत किया गया। यह अवसर था स्थानी सुभाष बोस उच्च माध्यमिक विद्यालय द्वारा सुभाष बोस जयंती पराक्रम दिवस पर निकाले ग जुलूस का। इस जुलूस को नायब तहसीलदार मुस्ताक खान ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। विद्यार्थियों की यह रैली नगर के मुख्य मार्ग सेवक चैक, कालीजी का चैक, शिव मन्दिर, स्टेशन रोड, मालियों का बास, राहुगेट, बस स्टैंड आदि स्थानों से होकर गुजरी। नगर की विभिन्न संस्थाओं लाडनूं युवा मंच, तेरापंथ महिला मण्डल, केरियर मंत्र व भाजपा युवा मोर्चा आदि की ओर से इस जुलूस का स्वागत किया गया। महेश व्यास, ललित सोनी, रामनिवास प्रजापत, सुशील पीपलवा, सुशील शर्मा, सुरेश जाजू, पार्षद सुमित्रा आर्य आदि ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर जुलूस का स्वागत किया।
विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया
इस जुलूस के बाद विद्यालय प्रागंण में सास्कृतिक कार्यक्रम व पुरस्कार वितरण का आयेाजन किया गया। पाबोलाव धाम के महंत स्वमी कमलेश्वर भारती के सान्निध्य में एवं वरिष्ठ साहित्यकार व शिक्षाविद रामकुमार तिवाड़ी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि तहसीलदार डा. सुरेन्द्र भास्कर थे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि उप पुलिस अधीक्षक राजेश ढ़ाका और मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी रामचन्द्र भाटी थे। वक्ताओं ने नेताजी सुभाषचन्द्र बोस की जीवनी पर प्रकाश डाला और उनसे प्रेरणा लेने की आश्यकता बताई। साथ ही विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए मोबाईल के दुष्प्रभावों के बारे में बताया और सावधानी आवश्यक बताई। इस अवसर पर आशीर्वचन देते हुए संत श्री महन्त कमलेश भारती पाबोलाव ने अपने बताया कि किसी भी प्रकार से गुरूजन विद्यार्थी का सच्चा मार्गदर्शक हो सकता है। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय में चल रहे बोर्ड कक्षाओं के प्री बोर्ड परीक्षा और सामान्यज्ञान प्रतियोगिता में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कक्षा 11 वी वाणिज्य वर्ग व कक्षा 9 द्वारा विज्ञान, वाणिज्य मॉडल प्रदर्शनी रखी गई। कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्य भंवरलाल मील ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन शक्तिसिंह ने किया।

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Author: kalamkala

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