शताब्दी वर्ष पर कुटुम्ब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण जागरण, स्वदेशी का भाव एवं नागरिक कर्तव्य पर संघ कर रहा है जन जागरण- महावीर आसोपा, लाडनूं की 6 बस्तियों से विजयादशमी पर निकला अलग-अलग पथ संचलन, फिर हुआ संगम, शहरवासियों ने किया जगह-जगह भावभीना स्वागत

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शताब्दी वर्ष पर कुटुम्ब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण जागरण, स्वदेशी का भाव एवं नागरिक कर्तव्य पर संघ कर रहा है जन जागरण- महावीर आसोपा,

लाडनूं की 6 बस्तियों से विजयादशमी पर निकला अलग-अलग पथ संचलन, फिर हुआ संगम, शहरवासियों ने किया जगह-जगह भावभीना स्वागत

लाडनूं (kalamkala.in)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने पर संघ की दृष्टि से लाडनूं की 6 बस्तियों में विजयादशमी उत्सव मनाया गया और विधिवत् पूजन के बाद पथ-संचलन अलग-अलग जगहों से निकाले गए। इस अवसर पर संघ के विभाग कार्यकारिणी सदस्य महावीर प्रसाद आसोपा ने स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि विजयादशमी असत्य पर सत्य की, अंधकार पर प्रकाश की, अन्याय पर न्याय की जीत के प्रतीक का उत्सव है। भगवान श्रीराम ईश्वर का अवतार होने के बावजूद सामान्य पुरुष की तरह सभी वर्गों को साथ लेकर अहंकार रूपी रावण का वध किया था। मां दुर्गा ने 9 दिन नवरात्रा में शक्ति उपासना के पश्चात महिषासुर का मर्दन किया था। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने वाले डॉ. हेडगेवार ने चिंतन किया कि हमारा देश अब आजाद तो हो जाएगा, लेकिन पुनः गुलाम नहीं होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। हमारा देश बार-बार गुलाम होता है, कुछ विदेशी आकर हमारे लोगो को साथ लेकर हमारे देश पर ही शासन किया, तो ध्यान आया कि हमारे यहां के मूल समाज हिन्दू समाज में संगठन का अभाव था, तब डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने सन् 1925 में विजयादशमी के दिन संघ की स्थापना की। तब से आज तक निरतंर संगठन का विस्तार होते हुए आज संघ के कार्य प्रत्येक गांव-गांव, बस्ती-बस्ती तक सुदृढ़ हुए हैं। संघ शताब्दी वर्ष पर कुटुम्ब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण जागरण, स्वदेशी का भाव एवं नागरिक कर्तव्य आदि पंच-परिवर्तन विषय पर घर-घर जाकर संघ के स्वयंसेवक सम्पर्क कर इन विषयों पर बातचीत कर रहे हैं।

विभिन्न बस्तियों से निकले संचलन का संगम, जगह-जगह हुआ स्वागत

शताब्दी वर्ष पर लाडनूं शहर की सभी 6 बस्तियों से अलग-अलग संचलन निकले, जिनका चार खम्भा हनुमान बालाजी मंदिर एवं अशोक स्तंभ पर पहले से निर्धारित समय पर सभी पथसंचलन एक हो गए, जो नगर में चर्चा का विषय रहा। नगर में निकले पथ संचलन का जगह-जगह माताओं-बहनों ने रंगोलियां बनाकर स्वागत किया, वहीं आमजन ने अपने घरों एवं प्रतिष्ठानों से पुष्पवर्षा कर पथ संचलन का स्वागत किया।

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Author: kalamkala

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