कलम कला-ध्यानाकर्षण:
कब थमेगी लाडनूं बस स्टेंड पर सांडों की धमा-चौकड़ी?
सांडों की भिड़ंत और उत्पात से परेशान हैं यात्री, व्यवसायी और नागरिकगण, सांडों ने लड़ कर मोटर साइकिलें तोड़ी- दुकान में घुस कर तोड़-फोड़ मचाई





लाडनूं (kalamkala.in)। शहर में निराश्रित पशुओं की समस्या बढ़ती ही जा रही है। प्रशासन का दावा है कि वे ऐसे गौवंश को पालिका कर्मियों से पकड़वा कर गौशाला में भिजवा रहे हैं, लेकिन लगता है यह पूरी कार्रवाई मात्र खानापूर्ति तक सिमट कर रह गई है। यहां का बस स्टेंड तो ऐसे बेसहारा गौवंश की अठखेलियों का अड्डा बन चुका है। सोमवार को सायं करीब 6 बजे बस स्टेंड पर दो सांड आपस में भिड़े और दो मोटर साइकिलों को तोड़ दिया तथा एक केबिननुमा दुकान को नुक़सान पहुंचाया। गनीमत रही कि इसमें कोई व्यक्ति घायल-चोटिल नहीं हुआ। बसों से उतरते-चढते यात्रियों, दुकानदारों और राहगीरों में भगदड़ सी मच गई। कुछ लोग लाठियां ले-लेकर भी भागे और सांडों को भगाने की चेष्टा की। काफी मशक्कत के बाद कहीं उन्हें बस स्टेंड पर अलग-अलग किया जा सका। इस सब हालात के कारण बस स्टेंड स्थित सभी दुकानदारों, यात्रियों और आमजन में बेहद रोष है।
बस स्टेंड पर खाद्य अपशिष्ट कचरा डालने से मचती है सांडों की धमाचौकड़ी
लोगों ने बताया कि कुछ सब्जी विक्रेता और होटलों वाले और अन्य दुकानदार रोज शाम को बस स्टेंड पर बहुत सारा कचरा डाल देते हैं। इसमें सड़ी-गली खराब सब्जी-फल, खाने-पीने का बचा खुचा सामान आदि खाद्य अपशिष्ट रहते हैं। इन सबके कारण शाम होते ही शहर के काफी सांड (गौवंश) यहां एकत्र हो जाते हैं। शाम होते-होते यहां भारी धमा-चौकड़ी शुरू हो जाती है। सांडों का बेखौफ विचरण सभी लोगों को खौफजदा कर देते हैं। बस स्टेंड पर आसपास में रहने वाले दुकानदारों ने यहां एक बैनर भी लगा रखा है, जिसमें पुलिस थाना लाडनूं की ओर से गन्दगी नहीं फैलाने का मैसेज है, लेकिन कचरा लाकर डालने वालों को इसका कोई डर नहीं है। बैनर के ठीक सामने कचरे के ढेर लगा कर चल देते हैं। लोगों में इस सारी स्थिति को लेकर गहरा रोष फैला हुआ है। गौरतलब है कि बस स्टेंड पर पहले भी एक महिला और एक तेली रोड का वृद्ध भी काफी घायल हो चुका और इनके अलावा भी अनेक लोगों को भी होस्पिटलाईज होना पड़ा था।
सांडों का खुला उपद्रव आचार्य श्री का प्रवास
नगर पालिका और उपखंड प्रशासन और अन्य जिम्मेदार लोगों को इस स्थिति पर गंभीरता से गौर करना चाहिए और इस पर संज्ञान लेते हुए समस्या के समाधान का स्थाई समाधान निकालना चाहिए। ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ जैसी कार्रवाई तो करनी- नहीं करनी बराबर है। आगामी फरवरी माह के प्रारंभ में ही आचार्य श्री महाश्रमण का लाडनूं में मंगल प्रवेश होने जा रहा है। इस अवसर पर उनके साथ उनकी धवल सेना के मुनिगण और सैंकड़ों श्रावक लोग साथ चलेंगे। निराश्रित गौवंश से उस समय कोई बड़ा हादसा भी संभावित हो सकता है। उनके साल भर के प्रवास काल में लाखों लोगों का आवागमन रहेगा। ऐसे में इन निराश्रित गौवंश की समस्या बहुत ही चिंताजनक साबित हो सकती है। प्रशासन को समय रहते कोई पुख्ता बंदोबस्त करना ही होगा। खिंदास में खुलने जा रही नंदीशाला फरवरी में आचार्य श्री महाश्रमण के लाडनूं आगमन के पश्चात ही प्रारंभ हो पाएगी। उसकी अभी कोई तिथि तय नहीं है। फिर नंदी को पकड़ने और नंदीशाला में छोड़ने की कवायद कितनी कारगर साबित हो पाएगी, यह भी अभी स्पष्ट नहीं है। बस स्टेंड पर रात्रिकालीन सफाई की व्यवस्था भी जरूरी है। शाम बाद यहां कचरे के ढेर लग जाते हैं, जो सांडों की भिड़ंत का कारण बनते हैं। नगर पालिका और पुलिस प्रशासन को ऐसे सब्जी विक्रेताओं व दुकानदारों को पाबंद करना चाहिए और चेतावनी के बाद कचरा डालने पर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए।







