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संस्कार, शिक्षा व सेवा कार्य की व्यापक श्रृंखला बनाने में संस्थान की अहम् भूमिका- सांसद राजेन्द्र गहलोत, संत शिरोमणि लिखमीदास महाराज स्मारक विकास संस्थान अमरपुरा का पांच दिवसीय पाटोत्सव सम्पन्न, माली समाज अध्यक्ष देवड़ा को विकास पुरुष सम्मान

संस्कार, शिक्षा व सेवा कार्य की व्यापक श्रृंखला बनाने में संस्थान की अहम् भूमिका- सांसद राजेन्द्र गहलोत,

संत शिरोमणि लिखमीदास महाराज स्मारक विकास संस्थान अमरपुरा का पांच दिवसीय पाटोत्सव सम्पन्न, माली समाज अध्यक्ष देवड़ा को विकास पुरुष सम्मान

नागौर। समीपस्थ अमरपुरा धाम में संत शिरोमणि लिखमीदास महाराज स्मारक विकास संस्थान के तत्वावधान में चल रहे पांच दिवसीय पाटोत्सव का सोमवार को समापन किया गया। इस अवसर पर अगले वर्ष 2023 में फिर अध्यात्म, धर्म, शिक्षा से संबंधित कार्यक्रमों के आयोजन किए जाने का संकल्प इसमें व्यक्त किया गया। यहां इस पांच दिवसीय छठे पाटोत्सव के तहत अनेक आयोजन किए गए। दूरदराज देशभर से आए माली समाज के मौजीज लोगों ने यहां आयोजित कार्यक्रमों में भाग लिया। कार्यक्रम में समाज द्वारा प्रकाशित की गई प्रतिभा मंजूषा 2022 का विमोचन भी अतिथियों के द्वारा किया गया। प्रतिभा मंजूषा में लब्ध प्रतिष्ठित शिक्षाविद, भामाशाह व उत्कर्ष शिक्षण संस्थान जोधपुर के निदेशक निर्मल गहलोत, सीकर की दिव्या सैनी, सांभर के शिक्षा क्षेत्र में प्रसिद्ध सैनी परिवार, समाजसेवी डॉ. इंद्रजीत टाक सहित अनेक विशिष्ट व्यक्तित्व का विवरण भी दिया गया है। साथ ही समाज की सभी प्रतिभाओं के फोटो सहित पारिवारिक विवरण सहित संपूर्ण जानकारी दी गई है। कार्यक्रम में समाज की 500 से अधिक प्रतिभाओं के साथ समाजसेवा व सहयोग कार्य करने वाले विशिष्टजन का भी सम्मान किया गया। संस्थान के अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत की अध्यक्षता में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।

संतों के सान्निध्य में दो स्थानों से निकली शोभायात्रा

स्मारक लोकार्पण व देव मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के इस छठे पाटोत्सव कार्यक्रम में शोभायात्रा का आयोजन भी किया गया। भव्य स्मारक उद्घाटन व देव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के छठे पाटोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान यात्रा संत लिखमीदास जी महाराज की जन्म स्थली बड़की बस्ती चेनार तथा राठौड़ी कुआं से शोभायात्रा प्रारंभ हुई. जहां दोनों शोभा यात्राओं का मिलन महावीर गोशाला रोड गुडला चैराहा के समीप हुआ। शोभायात्रा में संत रामप्रसाद महाराज, बालेसर के संत रामरतन महाराज, साध्वी सुखीबाई, समदड़ी के संत नरसिंहदास महाराज ने मार्गदर्शन प्रदान किया। संस्थान के कोषाध्यक्ष कमल भाटी व कार्यालय टीम के राधेश्याम टाक ने बताया कि अमरपुरा संस्थान के सचिव राधाकिशन तंवर, सैनिक क्षत्रिय माली संस्थान के अध्यक्ष कृपाराम देवड़ा, उपाध्यक्ष देवकिशन सोलंकी, सचिव मनीष कच्छावा सहित कार्यकारिणी के अन्य सदस्य, यात्रा प्रभारी सुरेश सोलंकी, प्रेमसुख सांखला, पापालाल सांखला, अनिल सोलंकी, चेतन गहलोत, दौलत भाटी, मांगीलाल गहलोत, टीकमचंद कच्छावा, नरेंद्र पंवार, कृपाराम गहलोत, धर्मेंद्र सोलंकी, नारायण पंवार मिस्त्री ने शोभायात्रा में सहयोग करते हुए सहभागिता दी।

नानीबाई रो मायरो कथा का आयोजन

संत लिखमीदासजी महाराज ने सदैव एकात्म भाव से कर्म करते हुए भगवत स्मरण किया

यहां पांच दिवसीय छठे पाटोत्सव के तहत अनेक आयोजन किए गए। दूरदराज से आए माली समाज के मौजीज लोगों ने यहां कार्यक्रम में भाग लिया। समारोह में रामस्नेही संत व बड़ा रामद्वारा जोधपुर के महंत परमहंस रामप्रसाद महाराज के मुखारबिंद से नानी बाई का मायरा की कथा का भी समाज के लोगों ने श्रवण लाभ लिया। नानी बाई का मायरा कथा में संत रामप्रसाद महाराज ने भक्त नरसी मेहता के अनेक प्रेरक जीवन प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सांवरा सेठ द्वारा भक्त नरसी मेहता की हुंडी का निष्पादन उस परिस्थिति में किया गया, जब उन्होंने भगवान को निश्चल भाव से स्मरण किया। इसी प्रकार अमरपुरा कर्म स्थली में संत शिरोमणि लिखमीदास जी महाराज द्वारा भी एकात्म भाव से कर्म करते हुए सदैव भगवत स्मरण किया। जीवन की अनेक विषम परिस्थितियों को में भी भगवत स्मरण नहीं छोड़ा. उन्होंने कहा कि जो समाज के प्रति समर्पित रहता है, वह भगवान के प्रति और भी अवश्य समर्पित रहता है। कथा में संत रामरतन महाराज ने कहा कि व्यक्ति को मन में सदैव दृढ़ संकल्प लेना चाहिए। जो हमें मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ है, इसमें हम यह संकल्प लें कि इस मनुष्य जीवन को सेवा, सहयोग के माध्यम से सफल बनाएंगे। कार्यक्रम में संत मुरलीराम महाराज का भी पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। कथा में आईदान राम भाटी, बहादुर सिंह भाटी, डॉ. शंकरलाल परिहार, सत्यनारायण परिहार, जेठाराम सांखला चौखा, चैनाराम गहलोत, सांगरिया, गणेशराम भाटी, मंगलाराम गहलोत, भोमाराम पंवार, बालेसर चेयरमैन रेवंतराम सांखला, उज्जैन प्रवासी सत्यनारायण कच्छावा सहित अनेक गणमान्य नागरिक व मातृशक्ति ने कथा श्रवण का लाभ लिया.

श्रेष्ठ पुरूषों के कार्य संतों की सिद्धभूमि पर अधिक प्रभावी हो जाते हैं

बालेसर धाम के संत रामरतन महाराज ने प्रवचन में कहा कि श्रेष्ठ महापुरुषों के कार्य व संतों की सिद्धि भूमि का व्यापक प्रभाव रहता है। संत शिरोमणि लिखमीदास महाराज की भक्ति व तप का अमरपुरा में बहुत व्यापक प्रभाव है। संत रामरतन महाराज के सान्निध्य में यज्ञ विधि-विधान पूर्वक संपन्न हुआ। यज्ञ आयोजन में अनु देवी-रेवंत राम, पप्पू देवी-बलराम, सरूदेवी-शेरा राम, पिंकी गहलोत-दीपक गहलोत, पुष्पा देवी-मोहन सिंह भाटी, लक्ष्मी देवी-बसंत राज भाटी, रेखा-प्रवीण सोलंकी, पुष्पा-देवकिशन सांखला द्वारा यजमान के रूप में यज्ञ में समिधा अर्पित की गई। इसके बाद देव मंदिर व स्मारक स्थल पर शिखर ध्वजारोहण किया। इससे पूर्व रात्रि में प्रसिद्ध भजन गायकों ने भजनों की प्रस्तुतियां दी। भजन जागरण का शुभारंभ पंडित लूणाराम सोलंकी की ओर से गणेश व सरस्वती वंदना से किया गया। समारोह के दौरान रामस्नेही संत व बड़ा रामद्वारा जोधपुर के महंत परमहंस रामप्रसाद महाराज के मुखारबिंद से नानी बाई का मायरा की कथा का भी समाज के लोगों ने श्रवण लाभ लिया। संस्थान के अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत, उपाध्यक्ष मोती लाल सांखला, सचिव राधाकिशन तंवर, कोषाध्यक्ष कमल भाटी, कार्यकारिणी सदस्य धर्मेंद्र सोलंकी, भगवानाराम, सैनिक क्षत्रिय माली संस्थान के अध्यक्ष कृपाराम देवड़ा ने कथा के प्रारंभ में संत शिरोमणि का पूजन वंदन किया। इस अवसर पर बहादुर सिंह भाटी, जीवनमल भाटी, पन्नालाल सांखला, लोकेश टाक, प्रेमचंद भाटी, नेमीचंद कच्छावा, झालावाड़ के हरगोपाल भाटी, मनोहर सांखला, चेतन गहलोत, प्रमोद पंवार, डॉ शंकरलाल परिहार सहित अनेक श्रद्धालु बंधुओं द्वारा कथा श्रवण का लाभ प्राप्त किया गया।

नर से बड़ा नारी को माना- अविनाश गहलोत विधायक जैतारण

विशिष्ट अतिथि जैतारण विधायक अविनाश गहलोत ने कहा कि अपने देश में नर से बड़ा नारी को माना गया है। संस्थान अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत ने कहा कि संतों का आशीर्वाद व मन में दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी कार्य कठिन नहीं है। इसी विचार के आधार पर संत शिरोमणि लिखमीदास महाराज की कर्म व तपोभूमि पर किया गया कार्य लक्ष्य सफलता के सोपान पर है। उन्होंने कहा कि संस्थान के माध्यम से संस्कार, शिक्षा व सेवा कार्य की व्यापक श्रृंखला बने इसी निमित्त आप सब का सक्रिय सहयोग अपेक्षित है। इस छठे पाटोत्सव के अवसर पर वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में माली सैनी समाज का राज्य स्तरीय प्रतिभा सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 500 प्रतिभाओं के सम्मान के साथ 22 प्रतिभाओं को स्वर्ण, रजत व लघु रजतपदक भी प्रदान किए गए। इस समारोह में विभिन्न कक्षा वर्गों के साथ-साथ राजकीय सेवा में चयनित बंधुओं तथा समाज जीवन में सेवा व सहयोग कार्य करने वाले तथा विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त करने वाले बंधुओं को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अश्विनी ने कहा कि सभी समाजों में शिक्षा व संस्कार का व्यापक महत्व है। इसमें परिवार के साथ-साथ भामाशाह व शिक्षाविदों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। कार्यक्रम का संचालन बालकिशन भाटी व बजरंग सांखला ने किया।

कृपाराम देवड़ा विकास पुरूष से सम्मानित

समारोह में महासचिव राधाकिशन तंवर ने बताया कि सैनिक क्षत्रिय माली समाज अध्यक्ष कृपाराम देवड़ा का संत परमहंस रामप्रसाद महाराज बड़ा रामद्वारा सुरसागर जोधपुर व संस्थान अध्यक्ष राज्य सभा सांसद व जैतारण विधायक अविनाश गहलोत व महात्मा ज्योतिबा फुले के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोतीबा फुले की ओर से संस्थान के पदाधिकारी व कार्यकारिणी सदस्य की उपस्थिति में स्वागत किया गया। देवड़ा का सम्मान उन्हें “विकास पुरुष” की उपाधि से अलंकृत करके किया गया।

अन्य भामाशाहों का भी किया गया सम्मान

कार्यक्रम में विभिन्न व्यवस्थाओं के पुण्य लाभार्थियों के साथ कृपाराम देवड़ा, भूमिदान समर्पण निधि के भामाशाह डॉ. रामस्वरूप सांखला, रामचंद्र सांखला, लोकेश टाक, जगदीश कच्छावा, पुखराज सांखला, धर्माराम भाटी, सुखराम सोलंकी, बहादुर सिंह भाटी, दिलीप सैनी, भगवानाराम तंवर, कृपाराम गहलोत, खींव सिंह सोलंकी, रामेश्वरलाल पंवार, रामगोपाल सांखला, भंवरलाल पंवार, दुर्गाराम सांखला, देवकिशन सोलंकी व छोटमल सोलंकी सहित अनेक भामाशाह को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर संस्थान के उपाध्यक्ष मोती लाल सांखला, सचिव राधाकिशन तंवर, हरिश्चंद्र देवड़ा, कोषाध्यक्ष कमल भाटी, कार्यकारिणी सदस्य पारसमल परिहार, धर्मेंद्र सोलंकी, पुरुषोत्तम सोलंकी, भोमाराम पंवार, भगवानाराम सुंदेशा, गोविंदराम टाक, लिखमीदास सेवा संस्थान दिल्ली के अध्यक्ष जबरा राम माली, चेतन गहलोत, दीपक गहलोत, टीकमचंद टाक, मांगीलाल गहलोत सहित देशभर से आए अनेक श्रद्धालु व समाज बंधु उपस्थित रहे।

kalamkala
Author: kalamkala

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