कार्तिक स्नान व पूजा का दौर.शुरू हुआ, खेण के कृष्ण मन्दिर में मनाया शरद पूर्णिमा महोत्सव, बीमारियों को दूर करता है खीर का प्रसाद

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खेण के कृष्ण मन्दिर में मनाया शरद पूर्णिमा महोत्सव, बीमारियों को दूर करता है खीर का प्रसाद

मूण्डवा (रिपोर्टर लाडमोहम्मद खोखर)। निकटवर्ती खेण गांव के कृष्ण मन्दिर में शरद पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मन्दिर में रखे गए भजन-संध्या कार्यक्रम में स्थानीय कलाकार रामनिवास ईनाणिया ने गणपति वंदना ‘मैं थाने सिऺवरू गजानन देवा..’ व गुरू वंदना ‘सतगुरू म्हाने प्रेम प्यालो पायो रै..’ से जागरण की शुरूआत की। श्रीराम वैष्णव ने ‘संसार में काऺई कियो रे भाई राम नाम नही लियो..’., गोविन्द सिंह कविया ने ‘मात पिता गुरू प्रभु चरणों में झुकते बारम्बार..’ तथा ‘भूलूं न एक घड़ी अजमल री रा कवराऺ…’ भजनों की आकर्षक प्रस्तुतियां दी। कलाकार रामदेव ईनाणिया ने और महिलाओं ने भी भजनों की प्रस्तुतियां दी। मन्दिर में चन्द्रमा की धवल चांदनी में खीरान्न (खीर), मतीरा, केला, आगरे का पेठा आदि प्रसाद रखा गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा अपनी सोलह कलाओं का प्रदर्शन करता है तथा इस रात को अमृत बरसता है। वैज्ञानिकों के अनुसार भी शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है, चन्द्रमा तब पृथ्वी के निकट रहता है। रात में चन्द्रमा की चांदनी में रखी खाद्य सामग्री का सेवन सांस की बीमार के लिए लाभदायक मानी गई है। ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद महीनों में शरीर में जो पित इकट्ठा होता है, वह ऐसी सामग्री के सेवन से शरीर से बाहर निकलता है। शरद पूर्णिमा से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि चन्द्रमा की धवल चांदनी से सुई में धागा पिरोने पर आंखों की रोशनी तेज होती है । इसी क्रम में गांव में बच्चों व युवतियो ने सुई में धागा पिरोने का प्रयास किया। साढ़े ग्यारह बजे पुजारी श्रीराम वैष्णव ने विधिवत् पूजा-अर्चना कर ठाकुरजी की आरती की। तत्पश्चात मन्दिर में आए धर्म प्रेमी भक्तों को प्रसाद का वितरण किया गया। भक्तों ने जागरण सुन भगवान के दर्शन कर प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। मन्दिर में अर्धरात्रि तक भक्तों की भीड़ मौजूद रहीं। इस प्रकार शरद पूर्णिमा के साथ ही कार्तिक स्नान भी शुरू हो गया। अब एक महीने कृष्ण मन्दिर में सुबह-सुबह भजन कीर्तन, विशेष मंगला आरती, कार्तिक महात्म्य कथा वाचन, महिलाओं द्वारा धार्मिक ज्ञानवर्धक कहानियां सुनाना, चरणामृत व प्रसाद वितरण आदि कई धार्मिक कार्यक्रम होंगे।

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Author: kalamkala

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