दुनिया शक्ति को पूजती है, शस्त्र के बिना शास्त्र की पूजा नही होती- संजय सोनी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर निम्बी जोधां में निकले पर संचलन का हुआ भावभीना स्वागत

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दुनिया शक्ति को पूजती है, शस्त्र के बिना शास्त्र की पूजा नही होती- संजय सोनी,

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर निम्बी जोधां में निकले पर संचलन का हुआ भावभीना स्वागत

लाडनूं (kalamkala.in)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर लाडनूं के निम्बी जोधां में पथ संचलन निकला। पथ संचलन कोयल चौराहा से प्रारम्भ होकर गांव के मुख्य मार्गो से होते हुए पुनः कोयल चौराहा पर सम्पन्न हुआ। पथ संचलन से पूर्व शस्त्र पूजन कार्यक्रम रखा गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वीर तेजाजी मंदिर के पुजारी शेराराम खीचड़ एवं मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागौर विभाग कार्यवाह संजय सोनी थे। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए विभाग कार्यवाह संजय सोनी ने कहा कि शास्त्र की पूजा तभी सम्भव है जब शस्त्र की पूजा होगी। दुनियां शक्ति को पूजती है, दुर्बल को कोई नहीं पूजता। सन 1925 में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने गुलामी के कालखंड का अध्ययन करते हुए संघ की स्थापना विजयादशमी के दिन की, ताकि सैंकड़ो वर्ष से बार-बार गुलाम होकर आजाद हो रहा देश बार-बार गुलाम नहीं हो। देश अपने पैरों पर समृद्धशाली और संगठित बने, ऐसा उन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई पूर्ण करने के बाद पूरा जीवन संघ के काम को मजबूत करने के लिये दिया।

एक नवम्बर से घर-घर होगा पंच परिवर्तन का व्यापक प्रचार 

विभाग कार्यवाह संजय सोनी ने संघ के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि हम सभी स्वयंसेवकों को शताब्दी वर्ष पर कार्य विस्तार और दृढ़ीकरण के उद्देश्य से संघ का कार्य गांव-गांव, ढाणी-ढाणी, घर-घर पहुंचे, इसके लिए समय देने का संकल्प लेना होगा। हमें शताब्दी वर्ष पर प्रत्येक घर-घर जाकर शताब्दी वर्ष पर पंच परिवर्तन के विषयों सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण जागरण, स्वदेशी का भाव, नागरिक शिष्टाचार को लेकर 1 से 16 नवम्बर तक घर-घर जाकर सम्पर्क करना है, ताकि शताब्दी वर्ष पर देश में अच्छे परिवर्तन का अनुभव हो।

ग्रामीणों ने बिछाये पलक-पांवड़े

निम्बी जोधां में पथ संचलन निकलने पर जगह-जगह ग्रामीणजनों ने स्वागत के लिए पलक-पांवड़े बिछा दिए। प्रबुद्धजनों ने भगवामय स्वागतद्वार लगाकर और पुष्पवर्षा कर पर संचलन स्वागत किया, वहीं माताओं-बहनों ने संचलन मार्ग पर रंगोलियां बनाकर पथ संचलन का स्वागत किया।

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Author: kalamkala

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