खुली आंखों से स्वप्न देखे और पुरूषार्थ व दृढ़ मनोबल से उन्हें साकार किया था तुलसी ने- साध्वीश्री कल्पलता,
लाडनूं में आचार्यश्री तुलसी का 112वां जन्म दिवस एवं समण श्रेणी स्थापना दिवस समारोह आयोजित

लाडनूं (kalamkala.in)। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के नवमाधिशास्ता आचार्यश्री तुलसी का 112वां जन्मदिवस समारोह तेरापंथ की राजधानी लाडनूं में दो चरणों में मनाया गया। प्रथम चरण का कार्यक्रम आचार्य तुलसी के दूसरी पट्टी स्थित जन्म स्थल पर साध्वी वृंद द्वारा सामूहिक रूप से प्रस्तुत गीतिका से मंगलाचरण द्वारा हुआ। आचार्य तुलसी के संसार,-पक्षीय पौत्र राजेन्द्र खटेड़ ने उनकी संक्षिप्त पारिवारिक पृष्ठभूमि की अवगति प्रदान करते हुए खटेड़ परिवार की ओर से सभी का स्वागत किया गया। तेरापंथ महिला मंडल की बहिनों तथा आचार्यश्री तुलसी के संसारपक्षीय पौत्र प्रदीप, मनोज, सुबोध खटेड़ ने गीतिका प्रस्तुत की और प्रपौत्र रौनक खटेड़ ने अपने भाव व्यक्त किये। समणी नियोजिका मधुरप्रज्ञा ने आचार्यश्री तुलसी के जन्मदिवस एवं समण श्रेणी के स्थापना दिवस पर अपने विचार व्यक्त करते हुए समण श्रेणी के प्रारंभिक इतिहास पर प्रकाश डाला। ‘शासन गौरव’ साध्वी कल्पलता ने गुरुदेवश्री तुलसी एवं जन्म स्थल से जुड़े रोचक संस्मरण सुनाये एवं कहा कि खटेड़ परिवार की पांच पीढ़ियों के सदस्य तेरापंथ धर्मसंघ में दीक्षित हैं, जो इस परिवार के लिये अत्यंत गौरव की बात है। द्वितीय चरण का कार्यक्रम पहली पट्टी स्थित ऋषभद्वार में साध्वी वृंद से मंगलाचरण से हुआ। तेरापंथ महिला मंडल से उपाध्यक्ष शोभा दूगड़, अणुव्रत समिति से अध्यक्ष शांतिलाल बैद, साध्वी कंचनरेखा, उपासिका डॉ. सुशीला बाफना, मुमुक्षु रुचिका ने आचार्यश्री तुलसी के प्रति अपनी भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ महिला मंडल की बहिनों, समणीवृंद, आचार्यश्री तुलसी के संसारपक्षीय पौत्र प्रदीप, मनोज, राजेंद्र खटेड़ ने गीतिकाओं के माध्यम से अपनी भावनाएं प्रस्तुत की । समणी नियोजिका मधुरप्रज्ञा ने कहा कि आचार्यश्री तुलसी जैसे महापुरूष की जन्मस्थली का गौरव लाडनूं को प्राप्त है। उन्होंने बताया कि 45 वर्ष पूर्व आज ही के दिन आचार्यश्री तुलसी ने विलक्षण दीक्षा के नाम से समण श्रेणी का शुभारंभ किया और मुझे भी उस प्रथम विलक्षण दीक्षा में दीक्षा लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। सेवाकेन्द्र व्यवस्थापिका साध्वी कार्तिकयशा ने कहा कि गुरुदेव तुलसी को साक्षात देखने का सौभाग्य तो मुझे प्राप्त नहीं हुआ पर उनके व्यक्तित्व एवं कृर्तत्व को पढ़कर व सुनकर ऐसा लगता है कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। मानव जाति को उन्होंने कितने-कितने अवदानों से उपकृत किया। ‘शासन गौरव’ साध्वीश्री कल्पलता ने कहा कि गुरुदेवश्री तुलसी ने तेरापंथ में विकास का राजमार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने खुली आंखों से स्वप्न देखे और अपने पुरूषार्थ एवं दृढ़ मनोबल से उन्हें साकार किया। समण श्रेणी उनका एक महास्वप्न था, जिसे उन्होंने मूर्त रूप दिया। वे संघर्षों से कभी नहीं घबराए और जीवनपर्यंत मानव मात्र की सेवा के लिए और संघ की सेवा के लिए कार्य करते रहे। उनके प्रति आज हम जितनी कृतज्ञता ज्ञापित करें, उतनी कम है। द्वितीय चरण के कार्यक्रम का संयोजन आलोक खटेड़ ने किया। आयोजन में जैन विश्व भारती के पूर्व अध्यक्ष धरमचंद लूंकड़, संचालिका समिति सदस्य प्रवीण बरड़िया, तेरापंथी सभा के मंत्री राकेश कोचर, तेरापंथ महिला मंडल उपाध्यक्ष समता बोकड़िया, पार्षद रेणु कोचर, प्रचार-प्रसार मंत्री सुमन नाहटा, संगठन मंत्री मीनू बोथरा, अणुव्रत समिति की मंत्री राज कोचर ,सुरेन्द्र बरमेचा, संजय बोथरा आदि एवं अन्य श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।






