लाडनूं नगर पालिका में आखिर यह क्या हो रहा है?- 10- लाडनूं नगर पालिका क्ी टेंडर प्रक्रिया में भारी घोटाले का अंदेशा, पार्षदों ने मचाया हंगामा, पालिका के 64 लाख के काम अटके, टेंडर बोक्स में चालाकी, सीलबंद व तालाबंद करने के बाद भी टेंडर लिफाफे निकाले जाकर वापस डाले जा सकते थे, सीसीटीवी कैमरों को खोल कर हटाया,

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लाडनूं नगर पालिका में आखिर यह क्या हो रहा है?- 10-

लाडनूं नगर पालिका की टेंडर प्रक्रिया में भारी घोटाले का अंदेशा, पार्षदों ने मचाया हंगामा, पालिका के 64 लाख के काम अटके,

टेंडर बोक्स में चालाकी, सीलबंद व तालाबंद करने के बाद भी टेंडर लिफाफे निकाले जाकर वापस डाले जा सकते थे, सीसीटीवी कैमरों को खोल कर हटाया,

(नोट- लाडनूं नगर पालिका में यह क्या हो रहा है? इसकी अब तक 9 किश्तें आप पढ चुके हो। मेरा मानना था कि अब और मौका नहीं मिलेगा कि इन किश्तों को आगे बढाया जाए, लेकिन हमने जिन वार्षिक निविदाओं में खाली टेंडर काॅपियां डाले जाने की खबर दी थी, उन्हीं में फिर घोटाला सामने अया है। सारा शहर लाईटों की मरम्मत, कचरा उठाने वाले ट्रेक्टरों आदि के कारण परेशान है और नगर पालिका इस कामों को करना चाह कर भी नहीं कर पा रही है, क्योेंकि लगता है कि बिना सांठगांठ और घोटाले के बिना तो यहां कोई टेंडर और कोई भी ठेका कार्य होना संभव ही नहीं रहा। 22 अगस्त को हुए हंगामे के बाद मैं स्वयं नगर पालिका पहुंच कर पूरा नजारा देखा और फिर सयह 10वीं कड़ी लिखने पर मजबूर हो गया। – जगदीश यायावर, वरिष्ठ पत्रकार, लाडनूं।)

जगदीश यायावर। लाडनूं (kalamkala.in)। नगर पालिका में लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगते ही जा रहे हैं। लगता है कि या तो नगर पालिका के अधिकारी सही तरीके से काम करना नहंी जानते या वे बहुत ही अधिक होशियार हैं, जिन्हें घोटाला करने में पूर्ण पारंगतता हासिल है। गुरूवार को नगर पालिका में फिर हंगामा खड़ा हो गया। शाम के समय यहां टेंडर खोलने की प्रक्रिया की गई, लेकिन पार्षदों का कहना है कि 22 अगस्त को कोई टेंडर खोला जाना ही नहीं था, ऐसी कोई एनआईटी नहीं थी। पता चला कि ये टेंडर 16 अगस्त को खोले जाने थे, लेकिन 16 की बजाय उन्हें 22 अगस्त को खोला गया है। साथ ही जिस पेटिका में टेंडर डाले गए थे, वह टूटी हुई थी और उसे चतुराई से खोली जाकर वापस बंद की जा सकती थी। इसे लेकर पार्षदों ने घोटाले के आरोप जड़ दिए।

ईओ से की जांच की मांग, पार्षदों ने हंगामे के बाद लिखा पत्र

इस सम्बंध में नगर पालिका के उपाध्यक्ष मुकेश खींची, पार्षद मुरलीधर सोनी, राजेश भोजक, संदीप प्रजापत, ओमप्रकाश सिंह मोहिल, बाबूलाल प्रजापत एवं आरके सुरपालिया, लोकेन्द्र सिंह नरूका व गोपाल राम ने हस्ताक्षर करके तत्काल एक पत्र निविदा में हुए भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए अधिशाषी अधिकारी को देकर इस पत्र में लिखा गया है कि आज दिनंाक 22 अगस्त 2024 को निविदा खोली गई, जो कि 16 अगस्त को खोली जानी थी। आज जब निविदा खोली गई तो टेंडर बोक्स टूटा हुआ व खुला हुआ मिला। टेंडर में डिफरेंस राशि से भी घोटाले का पता चला। तब इसका विरोध किया गया, तो अधिकारी व कर्मचारी कार्यालय छोड़ कर चले गए। सीसी टीवी देखने की मांग करने पर उन्हे ंसीसीटीवी नहीं दिखाया गया। पार्षदों ने बताया कि यह निविदा क्रमांक- न.पा.ला./2024/1850 दिनंाक-31.07.2024 थी, जिसमें 16 अगस्त को 3 बजे तक बंद लिफाफे में निविदाएं प्राप्त की जानी थी और उसी दिन सायं 4 बजे इन सभी निविदाओं को खोला जाना था। इस एनआईटी में कुल 64.20 लाख लागत के कुल 8 कार्य शामिल थे। इनमें नगर पालिका द्वारा लगाई गई स्ट्रीट लाईटों के रखरखाव व आॅन-आॅफ करने का कार्य वार्ड सं. 1 से लेकर 45 तक के 15 लाख रूपयों के, आवश्यकतानुसार बिजली सामान खरीद के 9.90 लाख रूपए, ट्रेक्टर ड्राईवर 4 और डम्पर प्लेसर के लिए ड्राईवर 1 के लिए 7 लाख, फोटोस्टेट व कार्टिªज सप्लाई का कार्य 6.50 लाख, टेंट व्यवस्था का ठेका वर्ष 2024-25 के लिए 9.90 लाख, कचरा परिवहन के लिए ट्रेक्टर मय ट्रोली 2 ड्राईवर सहित एवं 8 सफाई श्रमिक उपलब्ध करवाने हेतु 9.90 लाख रूपए तथा बैनर प्रिंटिंग तय फ्रेम फिटिंग कार्य 6 लाख रूपए शामिल हैं।

टूटा व खुला मिला टेंडर बोक्स

नगर पालिका में हुए हंगामे के दौरान ही शहर के पत्रकार भी मौके पर पहुंच गए और वहां पार्षदों के बताए अनुसार पालिकाकर्मियों के पास टेंडर बोक्स देखा, जो इस तरह से निर्मित किया हुआ था, कि उसे सीलबंद व तालाबंद किए जाने के बाद भी उसे चालाकी से खिसका कर खोला जा सकता था। पार्षदों ने उसे खोल कर भी दिखाया और उसकी पूरी प्रक्रिया मौके पर बताई, कि कैसे टेंडर काॅपियां निकाली जाकर उन्हें वापस अंदर डाली जा सकती है और फिर से उसे सीलबंद व तालाबंद दिखाया जा सकता है। इसके साथ ही पार्षदों ने खोले गए टेंडर के लिफाफों के कोर्नर दिखाए, जिन्हें फाड़ कर टेंडर निकाले गए थे। उन सभी लिफाफों के फाड़े गए काॅर्नर पर जो स्टेपल्स लगे थे, वो निकाले जाकर वापस लगाए गए थे। उन पर स्टेपल्स के डबल छेद साफ दिखाई दे रहे थे।

सीसीटीवी कैमरे कर डाले गायब

वहां कर्मचारियों से सीसीटीवी दिखाने के लिए कहा जाने पर उन्होंने बताया कि सीसीटीवी कैमरे नहीं है। जबकि वहां उस स्थापन शाखा कक्ष में दो सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे, उनकी फिटिंग वहां मौजूद थी, लेकिन कैमरे खोल कर हटा दिए गए थे। यह चालाकी भी आश्चर्यजनक थी। आखिर इतना शातिर दिमाग किसका है, जो यह सब खेल रच रहा है। पार्षदों ने बताया कि आज खोले गए इन टेंडरों में सभी टेंडर उन ठेकेदारों के थे, जिन्होंने सभी ने पहले टेंडर काॅपियां सादी ही बिना भरी हुई ही लिफाफों में रख कर डाल दी थी। बाद में हंगामा होने और तत्काल डीएलबी में शिकायत होने पर उस एनआईटी को ही निरस्त कर दिया था। गौरतलब है कि वह एनआईटी भी इन्हीं कामों के वार्षिक टेंडरों की थी। आखिर नगर पालिका लाडनूं में यह कया हो रहा है?

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Author: kalamkala

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