‘अमृत महोत्सव स्मारक’ बनाकर वीरों व शहीदों की स्मृतियों को स्थाई बनाया जाए

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लाडनूं। पिछले लम्बे समय से केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा सैनिकांे, गौरव सेनानियों, शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियो की स्मृतियों को स्थायी बनाने के लिए निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कारण कुछ स्वतंत्रता सेनानियों व शहीदों के नाम से वाचनालयों, विद्यालयों एवं सरकारी संस्थानों का नामकरण किया गया और कुछ के नामकरण शहीदों के नाम से निकट भविष्य मे होने वाले भी हैं। मगर कसूम्बी गांव से एकमात्र चौधरी जगत्ता राम घिंटाला के नाम से राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के पुस्तकालय एवं वाचनालय का नामकरण किया गया. है, ज़बकि स्वतंत्रता सेनानी नानूराम मील, हनुताराम बिरड़ा, शौर्यचक्र विजेता वीर भेरा राम व शहीद महेंद्र सिंह राठौड़ की स्मृति को स्थायी बनाने व उनके बलिदान से आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा दिलवाने के लिए ग्राम पंचायत, राज्य व केंद्र सरकार के स्तर पर अभी तक कुछ भी नहीं किया गया है। इस सम्बंध में कर्मचारी नेता व क्रांतिकारी विचारक जगदीश प्रसाद घिंटाला ने आजादी के अमृत महोत्सव- स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के महत्वपूर्ण अवसर पर एक ‘अमृत महोत्सव स्मारक’ बनाए जाने का सुझाव दिया है, जिसे बनाया जाकर देश के लिए बलिदान होने वाले वीर जवानों की समृति को चिरस्थाई बनाया जा सके और उनको सच्ची श्रद्धांजलि तथा सम्मान दिया जा सके।

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Author: kalamkala

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