लाडनूं में परम्परागत ढंग से भरा गया ऐतिहासिक गणगौर का बोलावणी मेला,
कर दिया प्राचीन सांस्कृतिक ठाट-बाट को पुनर्जीवित
लाडनूं (kalamkala.in)। क्षेत्र के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक व सामाजिक महत्व के गणगौर की बोलावणी के मशहूर मेले का आयोजन इस बार भी भव्य और दिव्य स्वरूप में आयोजित किया गया। मेले के दौरान शहर के निर्धारित मुख्य मार्गों से सवारी के रूप में राजसी ठाट-बाट के साथ भारी लवाजमे के साथ सजी-धजी गौर व ईशर को यहां राहूगेट प्रविष्ट करवाई जाकर राहूकुआं पर लाया गया और पूजा-अर्चना के बाद कुएं पर फेरे लगवाए गए।पालिकाध्यक्ष रावत खां ने सत्यनारायण मंदिर से गणगौर की सवारी को रवाना किया। इस दौरान कुएं पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला-पुरुष और गणगौर मेला समिति के पदाधिकारी, शहर के जनप्रतिनिधि व गणमान्य व्यक्ति, नगर पालिका और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी तथा कर्मचारी मौजूद रहे।
मेरा समिति के पदाधिकारियों का किया सम्मान
इस अवसर पर नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी भवानी शंकर व्यास एवं अन्य प्रमुख लोगों द्वारा मेला समिति के पदाधिकारियों को साफा व माला पहनाकर उनका सम्मान किया गया। इस अवसर पर मेला समिति के अध्यक्ष राजकुमार चौरड़िया, मंत्री नरपत सिंह गौड़, भाजपा नेता करणीसिंह, चांद कपूर सेठी, नरेन्द्र भोजक, नगर पालिका उपाध्यक्ष मुकेश खींची, पार्षद सुमित्रा आर्य, रेणु कोचर, विजयलक्ष्मी पारीक, मंजू, पंचायत समिति की पूर्व प्रधान पुष्पा शर्मा, अंजना शर्मा, पार्षद मोहनसिंह चौहान, जगदीश प्रसाद पारीक, शम्भु सिंह जैतमाल, विष्णु भोजक, हनुमान मल जांगिड़, पं. गौतम दत्त शास्त्री, सुशील पीपलवा, लूणकरण शर्मा, मदन गोपाल नवहाल, शिवशंकर बोहरा, बीरबल स्वामी, प्रकाश वर्मा आदि मौजूद रहे। पुलिस उप अधीक्षक विक्की नागपाल, थानाधिकारी महीराम बिश्नोई मय जाप्ता भी मौजूद रहे। मेले के चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मी, महिला कांस्टेबल और मेला समिति के कार्यकर्ता तैनात रहे।
एक सी ड्रेस में लगे महिला-पुरुष सुहावने
मेले में पुरुष एक जैसी वेशभूषा में एक से साफा धारण किए और महिलाओं एक सी वेशभूषा में नजर आए। मेले में समाजसेवी संस्थाओं ने प्याऊ लगा कर पेयजल की व्यवस्था की। चिकित्सा, अग्निशमन, उद्घोषणा आदि सभी के लिए नगर पालिका ने पर्याप्त बंदोबस्त किए थे। मेले में विभिन्न खाने-पीने के सामान, खिलौनों, कुल्फी, आइसक्रीम, ज्यूस आदि एवं उपयोगी सामान आदि की स्टालें लगी, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे उमड़ रहे थे। मेला स्थल बस स्टेंड से दिन भर बसों को डायवर्ट कर हटा दिया गया। मेले में स्काउट्स के बच्चों ने भी स्थिति संभाले रखी और लोगों की मदद की।
पहले गढ़ से सशस्त्र पहले में निकलती थी भव्य गणगौर की सवारी
गौरतलब है कि यह गणगौर का मेला लाडनूं में प्राचीन समय से ही चला आ रहा है। जागीरदारी के समय यहां गढ़ से गौर व ईशर की प्रतिमाएं सजी-धजी निकलती थी। प्रतिमाएं स्वर्णाभूषणों से लदी रहती थी। इनके साथ सशस्त्र सैनिक चलते थे। गौर व ईशर की प्रतिमाएं यहां की मोहिल जाति के लोग ही उठाते थे। उनके आने से पूर्व गौर व ईशर की प्रतिमाएं नहीं उठाई जा सकती थी। गढ़ के बाहर मेला लगता था जो राहूकुआं तक होता था। कालांतर में गढ़ की प्रतिमाओं को बेच दिया गया। तब तत्कालीन पालिकाध्यक्ष कन्हैयालाल सेठी ने जयपुर से नगर पालिका के तत्वावधान में गौर व ईशर की प्रतिमाएं मंगवाई और उन्हें सत्यनारायण जी के मंदिर में रखवाया गया, जहां से आज तक गणगौर निकाली जाती है।
