शरीर में वसा की अधिक मात्रा कैंसर के कई जोखिम बढाती है, ‘स्वास्थ्य व रोग’ सम्बंधी सेमिनार का आयोजन

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शरीर में वसा की अधिक मात्रा कैंसर के कई जोखिम बढाती है

‘स्वास्थ्य व रोग’ सम्बंधी सेमिनार का आयोजन

लाडनूं। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के शिक्षा विभाग में आजादी के अमृत महोत्सव योजना के तहत ‘स्वास्थ्य व रोग’ विषय में “बायोलॉजी: द साइंस ऑफ लाइफ” सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में बीएससी थर्ड सेमेस्टर की छात्रा खुशी जोधा ने सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक ‘कैंसर (मालिगनेंसी)’ के कारण, निदान, उपचार, नियंत्रण व कैंसर से जोड़ी न्यू रिसर्च आदि का विश्लेषण करते हुए व्यापक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नवीनतम अध्ययन रिपोर्टों के अनुसार, भारत की सबसे अधिक कैंसर दर केरल राज्य में सूचीबद्ध है। मिजोरम में देश में सबसे अधिक कैंसर से मृत्यु दर है। कैंसर से जुड़ी न्यू रिसर्च के संबंध में खुशी जोधा ने बताया कि इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर वर्किंग ग्रुप ने निष्कर्ष निकाला कि शरीर में वसा की अधिक मात्रा कई कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़ी है। एनआईसी के अनुसार एचपीवी वैक्सीन का एक डोज खुराक कैंसर पैदा करने वाले संक्रमणों से बचाता है। ब्रेन कैंसर वाले कुछ बच्चों के लिए लक्षित थेरेपी कीमो से बेहतर है।
जानें डीएनए की तकनीक
छात्रा साना ने अपने सम्बोधन में बताया गया कि डीएनए क्या है, कैसे ये हमारे जीवन में अहम भूमिका निभाता है, डीएनए की जांच के अलग-अलग तकनीकियों के बारे में बताया और आज के समय में ये तकनीकें कितनी काम आ रही है। बीएससी बीएड की छात्रा सपना निठारवाल ने सीआईपीए रोग के कारण, लक्षण व दुष्परिणामों के संबंध में बताया। सपना ने कहा कि सीआइपीए से पीड़ित लोगों को टिकट टाइम बम कहा जाता है। सेंट्रल सेंसटिविटी के बारे में जानकारी देते हुए सपना ने दिमाग में न्यूरोसिग्नल के परिवर्तन होने के कारण शरीर में आने वाले बदलावों के बारे में बताया। सेमिनार के संयोजक डॉ. विष्णु कुमार ने सेमिनार की रूपरेखा प्रस्तुत की। हमारे दैनिक जीवन में विज्ञान की उपयोगिता को स्पष्ट किया। विज्ञान की नई तकनीकों से अवगत करवाया। अंत में सेमिनार के अध्यक्ष प्रोफेसर बनवारीलाल जैन के द्वारा कैंसर और सीआईपीए के विषय में व्यापक जानकारी दी। डीएनए फिंगर प्रिंटिंग की महत्वता को बताया। बीपी, डायबिटीज और स्लिप डिस्क आदि बीमारियों के लक्षण, कारण व इलाज के विषय में भी बताया। सेमिनार का संचालन दिव्या पारीक ने किया। सेमिनार में सभी संकाय सदस्य व समस्त विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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Author: kalamkala

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