लाडनूं (डा. वीरेन्द्र भाटी मंगल)। स्थानीय रामद्वारा सत्संग भवन में चल रही श्रीमद भागवत कथा के छठे दिन रामस्नेही सम्प्रदाय के संत धीरजराम महाराज ने कथावाचन में कहा कि जो व्यक्ति संस्कार युक्त जीवन जीता है, वह अपने जीवन में कभी कष्ट नहीं पा सकता। श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कथावाचक संत धीरजराम महाराज ने रास पांच अध्याय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं, जिनमें गाये जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं, जो ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है।

महाराजश्री ने कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, उधव गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया। कथा के दौरान संत ने बताया कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा व परमात्मा का मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है। इस अवसर पर 56 भोग की झांकी सजायी गई। कार्यक्रम में नगर के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
भारत विकास परिषद् लाडनूं शाखा के सदस्यों ने इस भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में सपरिवार भाग लिया। परिषद् के प्रान्तीय वित्त सचिव सुशील पीपलवा के साथ सदस्य बेगाराम प्रजापत, नानक आडवाणी, हंसराज सोनी, लक्ष्मण शर्मा, नीतेश माथुर, प्रकाश सोनी, गणेश चौहान आदि ने कथा से पूर्व पूजन में सहभागिता प्रदान की। व्यवस्थाओं का दायित्व गोपाल प्रजापत, अमित गूजर, हरी ओम टाक, करण गूजर, चेतन भोजक आदि पर रहा।








