सांस्कृतिक

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अनित्य संसार में नित्य को पाने अर्थात् आत्म-कल्याण के लिए धर्म की दिशा में बढें- आचार्यश्री महाश्रमण, छापर में चातुर्मास सम्पन्न कर देवाणी पहुंचे आचार्यश्री महाश्रमण, एक दिन सुजानगढ प्रवास के बाद 11 नवम्बर को तेरापंथ की राजधानी लाडनूं में मंगल प्रवेश

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आचार्य महाश्रमण के लाडनूं में मंगल प्रवेश को लेकर तैयारियां जोरों पर, 11 से 13 तक होगा प्रवास, सभी संस्थाएं जुटी तैयारियों में, राज्यपाल के लिए हेलीपेड स्थल का निरीक्षण किया अधिकारियों ने

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अब अलविदा छापर- जिनेन्द्र पूजा, गुरु की पर्युपासना, प्राणियों के प्रति दया और अनुकंपा की भावना, सुपात्र दान, गुणों के प्रति अनुराग और आगमवाणी का श्रवण जरूरी है- आचार्यश्री महाश्रमण, ध्वज हस्तांतरण के कार्यक्रम में बायतू व्यवस्था समिति ने संभाला दायित्व

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विश्व की 25वीं एवं भारत की तीसरी समृद्ध भाषा राजस्थानी को मान्यता दिलाने मे सहयोग की मांग, मुरारी बापू से की गई राजस्थानी भाषा की मान्यता की गुहार, वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मणदान कविया का नाथद्वारा मे हुआ सम्मान

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गौमाता की सेवा, गायत्री का जाप और गीता का पाठ अवश्य करें, सच्चे प्रेमभाव से ही परमात्मा की प्राप्ति संभव है- कानपुरी महाराज, श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन कृष्ण की बाललीलाओं का वर्णन

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