देश भर की भाषाओं और रीति-रिवाजों को सीखने-समझने का मज़ेदार और आसान माध्यम है पॉडकास्ट- प्रो. जैन,
भारतीय भाषा उत्सव के सात दिवसीय आयोजन में पॉडकास्ट की भाषाई उपयोगिता पर कार्यक्रम आयोजित
लाडनूं (kalamkala.in)। जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग में एन.सी.टी.ई.एवं यू.जी.सी. के निर्देशानुसार मनाए जा रहे सात दिवसीय भारतीय भाषा उत्सव के अंतर्गत तृतीय दिवस ‘कई भाषाओं के त्यौहार और भाषा की आवाज़ पॉडकास्ट’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने की। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भारत की विभिन्न भाषाओं और उनकी संस्कृति को बढ़ावा देता है, जहां छात्र मिलकर भाषाएं सीखते हैं, त्योहारों से जुड़ते हैं और पॉडकास्ट के ज़रिए भाषाई विविधता और सांस्कृतिक समझ को बढ़ाते हैं। ये पॉडकास्ट भाषाओं और उनके रीति-रिवाजों को सीखने और समझने का एक मज़ेदार और आसान तरीका है। इसमें छात्र एक-दूसरे को अपनी भाषा के शब्द सिखाते हैं और एकता का संदेश देते हैं। यह एक ऐसी पहल है जो पॉडकास्ट और अन्य गतिविधियों के माध्यम से भाषाओं और त्योहारों को जोड़ती है ताकि लोग अपनी और दूसरों की संस्कृति को बेहतर समझ सकें और अपनी भाषा कौशल को निखार सकें। इसका उद्देश्य भाषाई विविधता के प्रति रुचि, ध्वनियों, बोलियों, संचार कौशल, अभिव्यक्ति-शैली, प्रस्तुतीकरण तथा रचनात्मकता को विकसित करना है। इस पॉडकास्ट में नैना, ललिता, कोमल आदि ने अपनी जिज्ञासाएं भी प्रस्तुत की, जिनका समाधान पॉडकास्ट टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. अमिता जैन ने किया। कार्यक्रम में समस्त संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।






