सामाजिक बुराईयों व आडंबरों के खिलाफ आवाज बुलंद कर महिलाओं को सशक्त बनाने में अग्रणी रही सावित्री बाई फुले- घिंटाला, ‘राष्ट्रीय शिक्षिका दिवस’ घोषित करने की मांग, लाडनूं में एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

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सामाजिक बुराईयों व आडंबरों के खिलाफ आवाज बुलंद कर महिलाओं को सशक्त बनाने में अग्रणी रही सावित्री बाई फुले- घिंटाला,

‘राष्ट्रीय शिक्षिका दिवस’ घोषित करने की मांग, लाडनूं में एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

लाडनूं (kalamkala.in)। महान समाजसेविका महिला उद्धारक शिक्षा की अलख जगाने वाली सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती पर अखिल राजस्थान राज्य संयुक्त कर्मचारी महासंघ के तत्वावधान में एक मुहिम शुरू करते हुए 3 जनवरी को ‘राष्ट्रीय शिक्षिका दिवस’ घोषित करवाने के लिए सोमवार को उपखंड अधिकारी लाडनूं के जरिए भारत सरकार को ज्ञापन भेजा गया है। यह ज्ञापन यहां उपखंड अधिकारी मीनू वर्मा के कक्ष में लाडनूं नगर पालिका के अध्यक्ष रावत खां लाडवाण, अखिल भारतीय कुशवाहा सैनी महासभा कुछ महिला जिलाध्यक्ष पार्षद व समाजसेविका सुमित्रा आर्य, रूपाराम टाक व राजेंद्र कुमार शर्मा ब्लाक प्रमुख प्रबोधक संघ सहित कई लोगों ने सौंपा और ज्ञापन के सम्बन्ध में उपखंड अधिकारी मीनू वर्मा से चर्चा भी की। प्रधान मंत्री को सम्बोधित इस ज्ञापन में 3 जनवरी, सावित्री बाई फुले की जयंती को राष्ट्रीय शिक्षिका दिवस घोषित करवाया जाने बाबत लिखा गया है कि 3 जनवरी, 1831 को नया गाँव, सतारा महाराष्ट्र में सावित्री बाई फुले का जन्म हुआ था। फुले को उनके परिवार एवं पति ज्योतिराव के समर्थन से समाज में महिलाओं के उन्नयन, सुधार एवं शिक्षा प्रचार-प्रसार के चलते पुणे में प्रथम बालिका स्कूल खोला, भेदभाव के खिलाफ लड़ी सामाजिक कुरीतियाँ-आडम्बरों का उन्मूलन किया, जिससे नारी विभिन्न बंधनों से मुक्त हुई व महिला शिक्षा, रोजगार व विकास को बल मिला। ऐसे में सावित्री बाई देश की प्रथम महिला शिक्षिका, महान समाज सुधारक बनी। जिसके लिए उनकी 195वीं जन्म जयंती से राष्ट्र भर में, 3 जनवरी को ‘राष्ट्रीय शिक्षिका दिवस’ घोषित करवाने की मुहिम शुरू की गई है।

देश की प्रथम महिला शिक्षिका का सम्मान जरूरी

अखिल राजस्थान राज्य संयुक्त कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद घिंटाला ने बताया कि महाराष्ट्र के सतारा जिले के नया गांव में जन्मी सावित्रीबाई फुले के पति ज्योति राव फुले व परिवार के सहयोग से पुणे में देश का पहला बालिका स्कूल खोलने, महिला शिक्षा को बढ़ावा देने, कुरीतियों, सामाजिक बुराईयों व आडंबरों के खिलाफ आवाज बुलंद कर महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ताउम्र प्रयास करने के चलते देश की प्रथम महिला शिक्षिका के खिताब से जाने-पहचाने जाने वाली शख्सियत के कृतित्व व जीवनी से भावी पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए सरकार को चाहिए कि 3 जनवरी को ‘राष्ट्रीय शिक्षिका दिवस’ घोषित करे। राजस्थान शिक्षक संघ अम्बेडकर के प्रदेश उपाध्यक्ष चन्द्रा राम मेहरा ने बताया कि सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती से इस मुहिम को शिक्षक संगठनों, जन संगठनों व आमजन के समर्थन व सहयोग से शुरू किया गया है। वरिष्ठतम पार्षद सुमित्रा आर्य ने बताया कि सावित्री बाई फुले ने महिलाओं और शूद्रों, पिछड़ों, मजदूरों, किसानों और गरीब तबकों के उत्थान के लिए अपना जीवन झोंक दिया था। उन्हें आज उनके त्याग और बलिदान का पूरा सम्मान मिलना जरूरी है। इस अवसर पर मोहनराम जानूं, पन्नाराम भामू, अब्दुल अजीज खां, सुरेंद्र सिंह राठौड़, सुमन सैनी, माया कंवर व गोपी राम बिजारणियां सहित कई लोगों ने मुहिम का हिस्सा बन कर सहयोग करने का फैसला किया है।

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Author: kalamkala

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