लाडनूं शहर के वार्डों का पुनर्गठन: प्रतिक्रियाएं- (2.)- बंद कमरों में बैठ कर किया गया वार्ड पुनर्गठन भौतिक रूप से मिलान नहीं करता, वार्डों को बिखेरा, सब सीमाएं बेढंगी, मंगलपुरा को किया पूरी तरह खुर्दबुर्द, यह परिसीमन खारिज करवाने के लिए अगर कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़े तो अवश्य जाएंगे

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लाडनूं शहर के वार्डों का पुनर्गठन: प्रतिक्रियाएं- (2.)-

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बंद कमरों में बैठ कर किया गया वार्ड पुनर्गठन भौतिक रूप से मिलान नहीं करता, वार्डों को बिखेरा, सब सीमाएं बेढंगी, मंगलपुरा को किया पूरी तरह खुर्दबुर्द,

यह परिसीमन खारिज करवाने के लिए अगर कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़े तो अवश्य जाएंगे

लाडनूं (kalamkala.in)। जिला प्रशासन ने लाडनूं नगर पालिका के वार्डों का पुनर्गठन किया और प्रारूप जारी किया और इसके साथ ही ‘कलम कला’ ने उसका प्रकाशन करके सार्वजनीकरण किया, वैसे ही पूरे शहर में जैसे भूचाल आ गया। लोगों की तेज और तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई। सारी प्रतिक्रियाओं पर नजर दौड़ाएं तो एक ही संदेश स्पष्ट रूप से सामने आता है कि लाडनूं में वार्ड-पुनर्गठन कार्य बिल्कुल ग़लत हुआ है और लगभग सभी पार्षद एवं प्रमुख लोग इससे असंतुष्ट हैं। इन प्रतिक्रियाओं में बहुत सी तो बहुत ही तीखी हैं और शब्द-प्रयोग फिर से किया जाना संभव नहीं है। फिर भी उन्हें कुछ सुधार करके और कुछ हूबहू प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। ‘कलम कला’ और हर मीडिया सरकार और जनता की बीच की कड़ी होता है, इसलिए आमजन की सामने आई आवाज को उठाना हमारा दायित्व है।

पुनर्गठन को लेकर विभिन्न पार्षदों के विचार-

पिछली कड़ी में आपने जागरुक युवा पार्षद राजेश भोजक के विचार पढ़ें थे, अब इस सम्बन्ध में कुछ और पार्षदों के बीच मची हलचल का भी आकलन करते हैं। यह सोशल मीडिया पर एक व्हाट्स एप ग्रुप में पार्षदों द्वारा व्यक्त किए गए उनके अपने विचार हैं।‌ इन सबमें नाराजगी की गहनता प्रतीत होती है। इनमें से ग्रुप में सबसे चर्चित रहे एक और पार्षद के विचार प्रस्तुत हैं।

यह परिसीमन करने वालों के प्लास्टिक के कीड़े पड़ेंगे 

पार्षद अमजद खान का कहना है कि इस वार्ड पुनर्गठन पर बहुत जल्दी ही कोर्ट का स्टे लग जाएगा। उन्होंने आगे यह भी लिखा है कि कितना भी पैसा लग जाए, ये प्लान पूरा नहीं होने देंगे और अगर हाईकोर्ट जाना पड़े या सुप्रीम कोर्ट, अवश्य जाएंगे। उनका मानना है कि यह ऐसा परिसीमन हुआ है कि यह पता तक नहीं चल रहा कि उनके खुद का मकान कौन से वार्ड में आएगा? साथ ही बताया है कि शहर के एक युवा नेता अपनी सीट की तलाश में मालासी व मंगलपुरा गांवों में घूम रहे हैं। वे सोच रहे हैं कि जैसे-तैसे उनकी पार लग जाए। इसके साथ ही यह भी अंकित किया है कि एक युवा नेता अभी से घूम रहे हैं और यह पुनर्गठन देख कर सोच रहे हैं कि अब उन्हें कांग्रेस से जुड़ने में लाभ है अथवा बीजेपी से। इसके अलावा उन्होंने यह बद्दुआ भी दी है कि ऐसा पुनर्गठन जिस किसी ने भी किया है, उसके प्लास्टिक के कीड़े पड़ेंगे। और क्या कर सकते हैं, लेकिन इन का इलाज भगवान अवश्य करेंगे और इनके कीड़े पड़ने ही हैं। उन्होंने स्थिति के बारे में इंगित किया है कि वे पूरे दिन से देख रहे हैं, लेकिन अपना वार्ड तक नहीं मिल पाया।उन्होंने बंद कमरों में बैठ कर करने पर सवाल उठाते हुए यह भी लिखा है कि जिसने भी यह किया है, उसे पैदल भेजो कि जाओ एक-एक वार्ड में और बताओ कि वह कहां से शुरू हो रहा है और कहां खत्म हो रहा है, उसका भौतिक सत्यापन करो, तो पता चलेगा बिना मौका देंगे ड्राफ्ट तैयार किए जाने के परिणाम स्वरूप कैसा गलत परिसीमन बना है। उदाहरण देते हुए उन्होंने लिखा है कि अग्रवाल मेडिकल गुलाम का घर 4 वार्ड में आ रहा है और उन बेचारों को टेंशन हो रही हैं कि अब वे अपना वोट कहां दें।

कैसे करवा सकते हैं यह परिसीमन निरस्त 

अंत में उन्होंने इस परिसीमन प्रक्रिया को रद्द करवाने के तरीके भी ग्रुप में शेयर किए हैं। उन्होंने इसे इस प्रकार से प्रस्तुत किया है-

वार्डों के परिसीमन को रद्द करने की विस्तृत प्रक्रिया-
वार्ड परिसीमन (Delimitation of Wards) एक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया है जिसमें नगर निकायों (नगर निगम, नगर पालिका, पंचायत आदि) के क्षेत्र को पुनः निर्धारित किया जाता है। इसे आमतौर पर जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर किया जाता है। यदि परिसीमन में कोई त्रुटि या अनियमितता है, तो इसे चुनौती देने और रद्द कराने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
1. कानूनी प्रक्रिया अपनाना
(A) न्यायालय में याचिका दाखिल करना-
यदि परिसीमन अवैध तरीके से हुआ है या उसमें गड़बड़ी हुई है, तो हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती दी जा सकती है। इसके लिए:
जनहित याचिका (PIL) दाखिल की जा सकती है यदि परिसीमन में सार्वजनिक हित की अनदेखी हुई है।
यदि किसी खास समुदाय या क्षेत्र के साथ भेदभाव हुआ है, तो संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का हवाला देकर याचिका दायर की जा सकती है।
याचिका में यह प्रमाणित करना होगा कि परिसीमन किस कानून या प्रक्रिया का उल्लंघन करता है।
(B) राज्य चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराना
राज्य चुनाव आयोग (State Election Commission) परिसीमन प्रक्रिया की निगरानी करता है।
शिकायत में यह स्पष्ट करना होगा कि परिसीमन में किस तरह की त्रुटि हुई है और इसे सुधारने की मांग करनी होगी।
(C) सूचना का अधिकार (RTI) दायर करना-
RTI के माध्यम से परिसीमन की पूरी प्रक्रिया, उसके मानदंड और निर्णय लेने की प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
यदि RTI से पता चलता है कि कोई अनियमितता हुई है, तो उसे कोर्ट या चुनाव आयोग में चुनौती दी जा सकती है।
2. राजनीतिक और सामाजिक दबाव बनाना
(A) जनप्रतिनिधियों से संपर्क करना-
अपने स्थानीय विधायक (MLA), सांसद (MP) या पार्षद से संपर्क करें और उनसे इस मुद्दे को विधानसभा या संसद में उठाने की मांग करें।
सरकार से परिसीमन की समीक्षा के लिए नए प्रस्ताव की मांग की जा सकती है।
(B) जनआंदोलन और विरोध प्रदर्शन-
यदि किसी समुदाय, जाति, या क्षेत्र विशेष के साथ परिसीमन में अन्याय हुआ है, तो विरोध प्रदर्शन, जनसभा, ज्ञापन सौंपने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों के जरिए मुद्दे को उजागर करना प्रभावी हो सकता है।
3. प्रशासनिक उपाय अपनाना
(A) नगर निगम/नगर पालिका से पुनर्विचार की मांग-
यदि परिसीमन में कोई त्रुटि है, तो संबंधित नगर निगम, नगर पालिका या पंचायत समिति को पुनर्विचार याचिका दी जा सकती है।
इसके लिए क्षेत्र के नागरिकों का समर्थन आवश्यक होगा।
(B) मुख्यमंत्री और गृह मंत्रालय को ज्ञापन देना
राज्य सरकार या गृह मंत्रालय से परिसीमन की समीक्षा करने के लिए ज्ञापन दिया जा सकता है।
यदि परिसीमन में राजनीतिक उद्देश्य या प्रशासनिक लापरवाही शामिल है, तो सरकार इसे रद्द कर सकती है।
4. परिसीमन को रद्द करने के लिए आवश्यक शर्तें
परिसीमन को रद्द करने के लिए निम्नलिखित आधारों पर कार्रवाई की जा सकती है:
✅ अगर परिसीमन में कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है।
✅ अगर किसी खास जाति, समुदाय या वर्ग के साथ भेदभाव हुआ है।
✅ अगर परिसीमन राजनीतिक लाभ के लिए किया गया है और निष्पक्ष नहीं है।
✅ अगर परिसीमन का आधार जनसंख्या असंतुलन या अन्य त्रुटियों पर आधारित है।
यदि उपरोक्त शर्तों में से कोई भी सही साबित होती है, तो परिसीमन को अदालत या सरकार द्वारा रद्द किया जा सकता है।
निष्कर्ष-
वार्ड परिसीमन को रद्द कराना आसान नहीं होता, लेकिन कानूनी लड़ाई, राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक उपायों के माध्यम से इसे चुनौती दी जा सकती है। अगर जनहित में उचित तर्क और प्रमाण हैं, तो न्यायालय, चुनाव आयोग या सरकार इसे रद्द करने या संशोधित करने पर विचार कर सकते हैं।

kalamkala
Author: kalamkala

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