Search
Close this search box.

Download App from

Follow us on

लाडनूं की अबतक की राजनैतिक स्थिति, पूरी रिपोर्ट

लाडनूं की अबतक की राजनैतिक स्थिति, पूरी रिपोर्ट

लाडनूं विधानसभा क्षेत्र बनने के बाद यहां कुल 14 चुनाव हो चुके हैं और इस बार 2023 का 15वां विधानसभा चुनाव होने को है। 15वें चुनाव में भाजपा के पूर्व विधायक रहे मनोहर सिंह का देहांत होने के बाद उनके पुत्र करणी सिंह पर भाजपा आजमाइश कर रही है, तो कांग्रेस के विधायक मुकेश भाकर को फिर से कांग्रेस ने मैदान में उतारा है। कुछ अन्य दल भी यहां खम ठोंक रहे हैं।
पिछले 14 चुनावों में लाडनूं की क्या स्थिति रही और कौन-कौन विधायक बने, इस बारे में आमजन के लिए पूरी जानकारी यहां प्रस्तुत की जा रही है। 
पहला विधानसभा चुनाव 1957
लाडनूं से पहले विधानसभा चुनाव में 1957 में कांग्रेस की ओर से रामनिवास मिर्धा ने चुनाव लड़ा था, उनके सामने राम राज्य परिषद की ओर से उम्मेद सिंह थे। इस चुनाव में सुनील रंजन निर्दलीय रूप में उतरे। कांग्रेस के रामनिवास मिर्धा को इस चुनाव में 57 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले। उन्हें 17 हजार 468 वोट मिले थे और वे विजयी रहे। उनके प्रतिद्वंद्वी उम्मेद सिंह को सिर्फ 7 हजार 517 वोट मिले।
दूसरा विधानसभा चुनाव 1962
लाडनूं के दूसरे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से मथुरादास माथुर को चुनाव मैदान में उतारा गया। उनके सामने निर्दलीय के तौर पर कन्हैयालाल थे। मथुरादास माथुर इससे पहले 1951 में डीडवाना से विधायक चुने गए थे। लाडनूं के चुनाव में मथुरादास माथुर को 17 हजार 127 मत मिले और उनकी जीत हुई। उनके निर्दलीय प्रतिद्वंद्वी कन्हैया लाल की उनके सामने हार हुई.
लाडनूं का 1967 का तीसरा चुनाव 
यहां 1967 में पहली बार लाडनूं क्षेत्र के ही निवासी भरनावां के रहने वाले हरजीराम बुरड़क ने स्वतंत्र पार्टी से चुनाव लड़ा था। तब लोकसभा व विधानसभा के चुनाव एक साथ थे। लोकसभा के लिए नन्दकिशोर सोमानी मौलासर चुनाव मैदान में थे और लाडनूं विधानसभा क्षेत्र से हरजीराम बुरड़क थे। दोनों का चुनाव कार्यालय यहां का जैन भवन एक साथ था। सोमानी ने तब जमकर पैसा खर्च किया था। स्वतंत्र पार्टी का चुनाव चिह्न तारा का निशान था और कांग्रेस का चिह्न बलदों (बैलों) की जोड़ी। यहां एक नारा (बैल) और एक तारा का प्रचार किया गया, जिसमें विधानसभा के लिए तारे पर और लोकसभा के लिए बलदों की जोड़ी को वोट देने की अपील थी। इसका नतीजा यह हुआ कि बुरड़क पहली बार विधानसभा में पहुंच गए। इस चुनाव में हरजीराम बुरडक के पक्ष में 20 हजार 339 वोट पड़े, जबकि रामनिवास मिर्धा को 19 हजार 067 मत मिले और वे चुनाव हार गए थे।
लाडनूं का 1972 का चैथा विधानसभा चुनाव
विधानसभा चुनाव 1972 में कांग्रेस ने रामनिवास मिर्धा की जगह दीपंकर शर्मा को कांग्रेस से मैदान में उतारा। हरजीराम बुरडक इस चुनाव में स्वराज पार्टी से मैदान में उतरे। इस चुनाव में हरजीराम बुरडक को 19 हजार 191 वोट ही मिल पाए, जबकि कांग्रेस के दीपंकर शर्मा को 26 हजार 552 मत मिले और उन्होंने जीत हासिल की। इन कसूम्बी निवासी शुकदेव शर्मा दीपंकर के समय में देश में इमर्जेंसी लगी थी और लाडनूं में अतिक्रमण हटाने की बाढ सी लग गई, लोग बहुत परेशान हुए। इसी कारण फिर वे कभी वापस नहीं जीत पाए।
लाडनूं विधानसभा का 1977 का पांचवा चुनाव
आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव में जनता लहर चली। इस बार कांग्रेस की ओर से फिर दीपंकर शर्मा उम्मीदवार थेको टिकट दिया और उनके सामने जनता पार्टी ने हरजीराम बुरडक को अपना उम्मीदवार उतारा। इस चुनाव में हरजीराम बुरडक को 28 हजार 084 मत मिले और उनकी जीत हुई। कांग्रेस के दीपंकर शर्मा को सिर्फ 13 हजार 021 वोट ही मिल पाए। इस चुनाव के बाद हरजीराम बुरड़क दूसरी बार विधानसभा में पहुंचे।
लाडनूं विधानसभा का 1980 का छठा चुनाव
1977 के विधानसभा चुनाव के 3 साल बाद ही हुए 1980 में वापस विधानसभा चुनाव में हुए। इस 1980 के चुनाव में जनता दल (एस) से हरजीराम बुरडक चुनाव मैदान में उतरे। उनके सामने कांग्रेस के उम्मीदवार दीपंकर शर्मा द्वारा नामांकन विड्रो कर लिए जाने के बाद उनका मुकाबला निर्दलीय उम्मीदवार रामधन राम सारण ने किया। इस मुकाबले में हरजीराम बुरड़क को हारना पड़ा तथा निर्दलीय रामधन राम सारण ने जीत हासिल की। रामधन को इस चुनाव में 21 हजार 976 मत मिले, जबकि हरजीराम को 17 हजार 871 ही मत प्राप्त हुए। रामधन में बाद में कांग्रेस को समर्थन दे दिया था। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का पहला टिकट जगदीश यायावर को मिला था, लेकिन उम्र कम होने के कारण उनका फार्म भी खारिज हो गया। फिर यहां से सुजानगढ के मदनलाल व्यास को पहली बार भाजपा से उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा गया था।
लाडनूं का 1985 को सातवां विधानसभा
इसके बाद 1985 में हुए विधानसभा चुनाव में हरजीराम बुरडक ने अपनी पार्टी बदलते हुए लोक दल का दामन थामा और लोकदल के टिकट से चुनाव मैदान में उतरे। उनके सामने कांग्रेस के टिकट से रामधन राम सारण थे। इस मुकाबले में रामधन को हार का मुंह देखना पड़ा। रामधन को 17 हजार 692 मत प्राप्त हुए, जबकि हरजीराम बुरडक ने 19 हजार 084 मत लेकरज ीत हासिल की।
लाडनूं का 1990 को आठवां विधानसभा चुनाव
लाडनूं के 1990 के विधानसभा चुनाव में हरजीराम बुरडक जनता दल के टिकट पर उतरे। इस बार कांग्रेसप्रत्याशी के रूप में नागौर प्रफुल्ल चंद रिणवां मैदान में आए। यहां पूर्व जागीरदार मनोहर सिंह ने निर्दलीय रूप में चुनौती दी। इस चुनाव में निर्दलीय मनोहर सिंह को 25 हजार 497 और जनता दल के हरजीराम बुरडक को 25 हजार 199 वोट मिले। इस प्रकार मनोहर सिंह विजयी रहे। कांग्रेस प्रत्याशी प्रफुल्ल चंद रिणवां 18 प्रतिशत वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
1993 का लाडनूं का नौंवा विधानसभा चुनाव
हरजीराम बुरडक ने 1993 के विधानसभा चुनाव में फिर पाला बदलते हुए कांग्रेस से टिकट लिया। उनके सामने भारतीय जनता पार्टी से जसवंतगढ निवासी छगनलाल दायमा मैदान में थे। इस चुनाव में कांग्रेस के हरजीराम ने 37 हजार 899 और भाजपा के छगनलाल को 30 हजार 942 मत प्राप्त किए और हरजीराम जीत कर चैथी बार विधानसभा पहुंचे।
लाडनूं का 1988 का 10वां विधानसभा चुनाव
लाडनूं में 1998 में हुए विधानसभा चुनाव में फिर से मुकाबला कांग्रेस के हरजीराम बुरडक और भाजपा के छगनलाल दायमा के बीच हुआ। इस चुनाव में कांग्रेस के हरजीराम बुरडक ने 46 हजार 389 वोट लिए और भाजपा के छगनलाल दायमा ने 44 हजार 525 वोट प्राप्त हुए। दायमा को यहां दूसरी बार हार का सामना करना पड़ा।
लाडनूं का 2003 का 11वां विधानसभा चुनाव
विधानसभा चुनाव 2003 में फिर कांग्रेस के टिकट पर हरजीराम बुरड़क मैदान में आए। इस बार उनके सामने भारतीय जनता पार्टी का टिकट लेकर मनोहर सिंह आए। मनोहर सिंह 1990 के चुनाव में निर्दलीय तौर पर हरजीराम को हरा चुके थे। इस चुनाव में फिर मनोहर सिंह ने 45 हजार 928 वोट लेकर हरजीराम को हार का मुंह दिखाया।
लाडनूं का 2008 का 12वां विधानसभा चुनाव
लाडनूं में 2008 के विधानसभा चुनाव में फिर हरजीराम बुरडक को कांग्रेस ने टिकट दिया, लेेिन ऐनवक्त पर उनका टिकट काट दिया गया। उनके स्थान पर लियाकत अली को कांग्रेस ने चुनवा लउ़ने का अवसर दिया। तब हरजीराम बुरड़क ने निर्दलीय ही चुनाव लड़ने की ठान ली। इस चुनाव में हरजीराम को 48 हजार 875 वोट मिले और उन्होंने जीत दर्ज करवाई। उनके सामने भाजपा के उम्मीदवार मनोहर सिंह को 40 हजार 677 मत मिले। इस मुकाबले में कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही। लियाकत अली को23 हजार 383 मत ही मिल पाए।
लाडनूं का 2013  का 13वां विधानसभा चुनाव
लाडनूं के 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने हरजीराम बुरड़क को ही टिकट थमा दिया। इस बार भी भाजपा ने मनोहर सिंह को ही मैदान में उतारा। इसमें भाजपा के मनोहर सिंह को 73 हजार 345 मत मिले और उन्हें जीत मिली। उनके सामने कांग्रेस के हरजीराम को 50 हजार 294 वोट मिले। इस बार फिर मनोहर सिंह विधायक बन गए।
लाडनूं का पिछला 2018 को 14वां विधानसभा चुनाव
लाडनूं के 2018 के चुनाव के बाद हरजीराम बुरडक का निधन हो गया और कांग्रेस युवा छात्र नेता मुकेश भाकर को अपना उम्मीदवार बनाया। उनके सामने तीन बार विधायक रह चुके मनोहर सिंह को भाजपा ने टिकट दिया। मुकेश भाकर ने इस चुनाव में 65 हजार 041 वोट लेकर जीत हासिल की। भाजपा के मनोहर सिंह को 52 हजार 094 वोट ही मिले।

लाडनूं के अब तक के विधायक

1957 –      रामनिवास मिर्धा         –        कांग्रेस
1962 –      मथुरादास माथुर         –        कांग्रेस
1967 –      हरजीराम बुरड़क       –       स्वतंत्र पार्टी
1972 –     दीपंकर शर्मा शुकदेव   –      कांग्रेस
1975 –     हरजीराम बुरड़क       –      जनता पार्टी
1980 –    रामधन राम सारण      –     निर्दलीय
1985 –    हरजीराम बुरड़क        –     लोकदल
1990 –    मनोहर सिंह                –     निर्दलीय
1993 –    हरजीराम बुरड़क        –      कांग्रेस
1998  –   हरजीराम बुरड़क        –     कांग्रेस
2003 –    मनोहर सिंह                –     भाजपा
2008  –   हरजीराम बुरड़क        –     निर्दलीय
2013  –   मनोहर सिंह                –     भाजपा
2018 –   मुकेश भाकर               –     कांग्रेस
kalamkala
Author: kalamkala

Share this post:

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर

कोरोना अपडेट

Weather Data Source: Wetter Indien 7 tage

राशिफल

error: Content is protected !!

We use cookies to give you the best experience. Our Policy